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आपकी मौत से बचने का रहस्य , महामृत्युंजय मंत्र में छुपा है जानिए

जानकारी के लिए बता दे की महामृतुंजय मन्त्र है ! जिससे मृत्यु भी घबराती है इस मन्त्र में इतनी शक्ति है की खुद यमराज भी उस व्यक्ति के प्राण लेने से पहले कई बार सोच में पड़ जाते है क्योंकि ये मंत्र स्वयं महाकाल को प्रसन्न करता है ! जिससे की महाकाल प्रसन्न हो जाये उसे मौत का कैसा डर ! महामृत्युंजय मन्त्र की उत्पत्ति हुई इसलिए है ताकि काल को भी पराजित किया जा सके ! एक बार यमराज ने महाकाल के इस मन्त्र को अनदेखा करके प्राण हरने की कोशिश की थी

आपको बता दे की ये बात उस समय की है जब महादेव के सबसे बड़े भक्त मृकंडऋषि अपनी संतान न होने के कारण दुखी थे ! उनको संतान की चाह बहुत थी जबकि उनकी कुंडली में संतान प्राप्ति का योग था ही नहीं ! ऐसे में उनको महादेव की याद आई उन्होंने महादेव ही इसे भगवान् है जोकि पुरे विधि के विधान को बदल देते है ! इसलिए उन्होंने महादेव की घोर तपस्या करने का निर्णय लिया और उनकी आराधना में लीन हो गये. मृकंडऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान तो दे दिया ! लेकिन साथ में ये भी था की इस खुशी के अगले दिन ही तुम्हे एक बहुत बड़े दुःख का भी सामना करना पड़ेगा अब वो दुःख क्या होगा इसका जिक्र उन्होंने नही किया.

जानकारी के लिए बता दे की मृकंडऋषि को बहुत ही जल्द एक पुत्र की प्राप्ति होती है ! इसके बाद ज्योतिषियों ने उन्हें बताया की इस पुत्र की आयु केवल 12 वर्ष ही है ये सुनकर मृकंडऋषि को गहरा सदमा लगा इसके बाद उन्होंने अपने पुत्र को महामृत्युंजय मन्त्र जाप की शिक्षा दी ! समय के साथ साथ पुत्र बड़ा होता गया तो माता – पिता दोनों को दुखी देखकर पुत्र ने पुत्र ने माता से पूछा तो पूरी बात सुनकर उसने माँ से कहा कि वह महाकाल से दीर्घायु का वरदान लेगा ! उसके बाद कुछ ऐसा हुआ की शिवजी की आराधना के लिए मारकंडे ने महामृत्युंजय मन्त्र की रचना की. इसके बाद वह समय भी आ गया जब मारकंडे 12 साल के हो गये !

जब यमदूत मारकंडे को लेने आये तो उन्होंने देखा की वे महाकाल की आराधना कर रहे है तो उन्होंने थोड़ी देर प्रतीक्षा करने लगे ! लेकिन जब काफी देर तक भी मारकंडे की आराधना खत्म नही हुई ! तो फिर वो खली हाथ वापिस चले आये गये ! इसके बाद खुद यमराज उसे लेने के लिए आये तो मारकंडे शिवलिंग से लिपट गए लेकिन यमराज ने उन्हें खींचकर अपने साथ ले जाने की कोशिश की तो उसके उसके बाद सामने महाकाल प्रकट हुए ! इसके बाद उनके प्रचंड रूप को देखकर यमराज डर गए और उन्होंने महादेव से क्षमा मांगी.

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