
जन्म प्रमाण पत्र अब हर परिवार के लिए अनिवार्य दस्तावेज बन चुका है। 2026 में लागू सख्त गाइडलाइंस के तहत देरी से आवेदन पर एसडीएम की मंजूरी जरूरी हो गई है। इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा और प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी, लेकिन समय पर ध्यान न दिया तो परेशानी हो सकती है।
समय सीमा क्यों महत्वपूर्ण?
बच्चे के जन्म के ठीक 21 दिनों के अंदर आवेदन सबसे आसान रहता है। इस दौरान कोई अतिरिक्त मंजूरी या शुल्क नहीं लगता। ग्रामीण इलाकों में पंचायत सचिव और शहरी क्षेत्रों में प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सीधे प्रमाण पत्र जारी करते हैं। देरी होने पर प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
एक साल बाद एसडीएम की भूमिका
अगर जन्म एक साल से ज्यादा पुराना है, तो एसडीएम या डीएम स्तर का आदेश अनिवार्य कर दिया गया। पहले स्थानीय बीडीओ के हस्ताक्षर से काम चल जाता था, लेकिन अब उच्च अधिकारी की जांच जरूरी है। यह कदम डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया। विशेष मामलों जैसे गोद लेना या नाम सुधार में भी यही नियम लागू होता है।
जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करें
प्रमाण पत्र बनवाते समय ये कागजात साथ रखें:
- अस्पताल या डॉक्टर की रिपोर्ट।
- माता-पिता का आधार, पैन या अन्य पहचान पत्र।
- दो गवाहों का शपथ पत्र।
- सेविका रजिस्टर या स्कूल रिकॉर्ड यदि उपलब्ध।
इनके बिना आवेदन अस्वीकार हो सकता है। देरी के स्पष्टीकरण के लिए अलग से हलफनामा तैयार रखें।
ऑनलाइन प्रक्रिया सरल बनी
अब राज्य सरकार के पोर्टल पर घर बैठे आवेदन करें। पहले एसडीएम कार्यालय जाकर आदेश लें, फिर प्रमाण पत्र फॉर्म भरें। अपलोडेड दस्तावेजों का सत्यापन होने पर डिजिटल कॉपी डाउनलोड हो जाती है। ट्रैकिंग सुविधा से स्टेटस चेक करना आसान है। प्रक्रिया में मामूली शुल्क लगता है, जो देरी के अनुसार बढ़ सकता है।
संशोधन के नए नियम
पुराने प्रमाण पत्र में जन्म तिथि, नाम या माता-पिता का विवरण बदलना हो तो भी एसडीएम अनुमति लें। 27 अप्रैल 2026 तक सुधार की अंतिम समय सीमा है। उसके बाद कोई बदलाव संभव नहीं। आधार कार्ड अब जन्म प्रमाण पत्र के विकल्प के रूप में मान्य नहीं रहेगा।
क्यों उठाया यह कदम?
सरकार का मकसद सिस्टम को डिजिटल और भरोसेमंद बनाना है। पहले देरी और गड़बड़ी की शिकायतें आम थीं। अब हर एंट्री का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जाता है। स्कूल प्रवेश, पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं और नौकरी के लिए प्रमाण पत्र जरूरी हो गया। लाखों परिवारों को इसका लाभ मिलेगा।
सलाह, अभी शुरू करें
देरी से बचें क्योंकि जांच प्रक्रिया लंबी चल सकती है। जन्म होते ही स्थानीय रजिस्ट्रार से संपर्क करें। सरकारी वेबसाइट नियमित चेक करें। सही दस्तावेज और समयबद्धता से बिना झंझट प्रमाण पत्र आपके हाथ में होगा। यह दस्तावेज जीवनभर काम आएगा।
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